सुहाग की लंबी उम्र के लिए महिलाएं आज रखेंगी व्रत

शहडोल। सात जन्मों की कसमें खाकर हम सफर बने पति-पत्नी के प्रेम और स्नेह का प्रतीक पर्व करवा चौथ पर्व आज को मनाया जाएगा। सुहागिन महिलाएं निर्जला व्रत रखकर अपने सुहाग की सलामती की कामना करेंगी। सांय को चांद देखने के बाद ही महिलाएं अपना उपवास खोलेंगी। इसके साथ ही शहर में कई स्थानों पर करवा चौथ उद्यापन के आयोजन भी होंगे। कहीं पर करवा चौथ एक साथ मनाया जाएगा, तो कहीं पर करवा चौथ व्रत का उद्यापन होगा। इधर मंगलवार को महिलाओं ने मेहंदी उत्सव भी धूमधाम से मनाया। वहीं बाजारों से करवा व पूजन सामग्री भी खरीदी। दिनभर बाजारों में भीड़ नजर आई। पंडितों की मानें तो बुधवार को चंद्रोदय का समय विराट नगरी में 8.01 बजे का है।
चांद देखे बिना अधूरा व्रत
कारवा चौथ का व्रत चतुर्थी के चांद को देखकर ही खोला जाता है, हर शहर में चंद्रोदय का समय अलग अलग होता है। इस दिन महिलाएं चंद्रमा को देखे बिना न तो कुछ खाती हैं और न ही पानी ग्रहण करती हैं। चंद्रमा का उदय होने के बाद सबसे पहले महिलाएं छलनी में से चंद्रमा को देखती हैं फिर अपने पति को, इसके बाद पति अपनी पत्नियों को लोटे में से जल पिलाकर उनका व्रत पूरा करवाते हैं। चांद देखे बिना यह व्रत अधूरा रहता है।
सच्चे दिल से विजय की कामना
करवा नामक महिला की कथा के अलावा एक अन्य कथा भी है, एक बार देवताओं और दानवों के युद्ध में देवताओं की हार होने लगी। भयभीत देवता ब्रह्मदेव के पास गए और उनसे रक्षा की प्रार्थना की। ब्रह्मदेव ने कहा कि इस संकट से बचने के लिए सभी देवताओं की पत्नियों को अपने-अपने पतियों के लिए व्रत रखना चाहिए और सच्चे दिल से उनकी विजय की कामना करनी चाहिए। ऐसा करने पर इस युद्ध में देवताओं की जीत निश्चित हो जाएगी। ब्रह्मदेव के कहे अनुसार कार्तिक माह की चतुर्थी के दिन सभी देवताओं की पत्नियों ने व्रत रखा और अपने पतियों की विजय के लिए प्रार्थना की। उनकी यह प्रार्थना स्वीकार हुई और युद्ध में देवताओं की जीत हुई। इस खुशखबरी को सुन कर सभी देव पत्नियों ने अपना व्रत खोला और खाना खाया। उस समय आकाश में चांद भी निकल आया था, माना जाता है कि इसी दिन से करवा चौथ के व्रत के परंपरा शुरू हुई।

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