सचिव के बिगड़े बोल, ”ऑफ रिकार्ड” साहब ले रहे कमीशन

ममरा पंचायत में टिन नंबर पर हुए भुगतान

दर्जनों पंचायतों में हरिओम ट्रेडर्स ने जिम्मेदारों के साथ मिलकर खेला-खेल

शहडोल। जिले की बुढ़ार जनपद की सुदूर ग्राम पंचायतों में सैकड़ों ऐसे प्रतिष्ठान संचालित हैं, जिनके द्वारा सीमेंट, रेत, गिट्टी के अलावा भवन निर्माण व अन्य कार्यालयीन उपयोगी सामग्री कहीं से खरीदी नहीं गई है, लेकिन उनकी बिक्री के आंकड़े करोड़ों के हैं, इनके द्वारा पंचायतों में बिल लगाकर प्रतिष्ठान या फिर संचालकों के व्यक्तिगत खातों में भुगतान लिये जा रहे हैं, हद तो इस बात की है कि वर्ष 2017 से जीएसटी पूरे देश में लागू है, लेकिन जीएसटी का पालन तक नहीं हो रहा है, अधिकांश व्यापारियों के पास जीएसटी नंबर तक नहीं है और उनका टर्न-ओव्हर निर्धारित सीमा से कहीं अधिक है। पंचायतों में लग रहे बिलों में कहीं अब तक बंद हो चुके टिन नंबरों का उपयोग हो रहा है, तो कई संस्थान तो सादे कागजों पर ही पंचायतों से भुगतान उठा रहे हैं।
टिन नंबर पर लाखों के बिल
बुढ़ार जनपद की ग्राम पंचायत ममरा के जिम्मेदारों ने शासन की समस्त योजनाओं में बट्टा लगाने के लिए मेसर्स हरिओम ट्रेडर्स नामक फर्म संचालक से सांठ-गांठ कर ग्राम पंचायत में पंच परमेश्वर योजना हो चाहे , प्रधानमंत्री आवास हो, चाहे शौचालय निर्माण का कार्य हो सारी योजनाओं में अहम भूमिका रहती है और समस्त योजनाओं में जमकर हेरफेर किया गया, मजे की बात तो यह है कि जीएसटी लागू होने के बाद भी कथित फर्म संचालक द्वारा पंचायतों में टिन नंबर के लाखों के बिल लगाये।
बगैर जीएसटी नंबर के भुगतान
वर्ष 2018 में हरिओम ट्रेडर्स नामक फर्म के संचालक ने जीएसटी की प्रक्रिया को धता बताकर दर्जनों पंचायतों में सांठ-गांठ कर निर्माण कार्याे में सप्लाई के नाम लाखों के भुगतान लिए, जबकि जिनके पास जीएसटी नंबर नहीं थे, उन्हें गिट्टी, रेत और ईंट तक के बिल दिये गये, जबकि वह इस पात्रता में आते ही नहीं थे। पंचायतों में निर्माण कार्याे के नाम किए गए भुगतान के ऐसे बिल मौजूद हैं, जिनमें लाखों रूपये के भुगतान सप्लायर्स के खातों में किया गया है।
जांच से होगा मामले का खुलासा
निर्माण कार्य से पहले ममरा ग्राम पंचायत के जिम्मेदारों को निर्माण सामग्री सप्लाई करने के लिए भरोसे मंद सप्लायर को ढूंढते हैं, जो उनकी सुविधा अनुसार बिल लगाकर दे। उस बिल के आधार पर सप्लायर्स को भुगतान किया जाता है। भुगतान के बाद पंचायत के जिम्मेदार राशि वापस ले लेते हैं, क्योंकि कुछ पंचायतों के निर्माण कार्य कागजों में ही पूरे होते हैं, धरातल पर नहीं। इसलिए जनपद पंचायत बुढ़ार की दर्जनों पंचायतों में कथित फर्म संचालक ने फर्जी बिल लगाये हंै।
वेण्डरों की होनी चाहिए जांच
जिले की लगभग पंचायतों में वेण्डर जनपद व ग्राम स्तर पर जुगाड़ साझा कर बिना जीएसटी वाले बिलों में भुगतान उठा रहे हैं, साझा कार्यक्रम के तहत लग रहे बिलों और भुगतान की हालत यह है कि जिम्मेदार अब तक जीएसटी की जगह टिन नंबर वाले बिलों पर ऑन लाईन भुगतान कर रहे हैं, जबकि यह व्यवस्था 2017 में ही केन्द्र सरकार द्वारा एक देश-एक कर की व्यवस्था लागू होने के बाद समाप्त हो गई थी, अधिकांश दुकाने तो सिर्फ प्रिंटेड बिलों पर चल रही हैं। न तो दुकानों का पता है और न ही बेची जा रही सामग्री का, लेकिन फर्जी वेण्डरों की आई बाढ़ में सबकुछ बेरोक-टोक चल रहा है।
इनका कहना है…
सामग्री हरिओम ट्रेडर्स के संचालक द्वारा दी गई है, जीएसटी नंबर से क्या होता है, फर्म है, सप्लाई दिया है और आपको ऑफ रिकार्ड बताऊं तो, जनपद वाले साहब समय-समय पर अपना कमीशन लेते हैं, तब तो काम मिलता है भईया।
शिवशंकर मिश्रा
सचिव
ग्राम पंचायत ममरा

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